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लूट लेते हैं अपने ही, वरना गैरों को कहा पता, इस दिल की दीवार कहाँ से कमज़ोर हैं
दर्द, गम, डर जो भी है बस तेरे अंदर हैं, खुद के बनाये पिंजरे से निकल कर देख, तू भी एक सिकंदर हैं
सपनों को हकीकत में बदलने की शुरुआत हमेशा एक छोटे कदम से होती है।
मैं हमेशा डरता था उसे खोने से ! उसने ये डर ही ख़त्म कर दिया मुझे छोड़कर.
अपनी पीठ की मजबूती को बढ़ाए, शाबाशी और धोखा दोनों पीछे से ही मिलते है।
कोशिश हमेशा परिणाम मिलने तक करें,क्योंकि दुनिया सिर्फ परिणामों को सलाम करती हैं, कोशिशों को नहीं!
यदि किसी काम को करने में डर लगे तो याद रखना यह संकेत है, कि आपका काम वाकई में बहादुरी से भरा हुआ है
यही जज्बा रहा तो मुश्किलों का हल भी निकलेगा, जमीं बंजर हुई तो क्या वहीं से जल भी निकलेगा, ना हो मायूस ना घबरा अंधेरों से मेरे साथी, इन्हीं रातों के दामन से सुनहरा कल भी निकलेगा
मजबूत बनो मेरे दोस्त, ये दुनिया किसी पर रहम नहीं करती
पीठ हमेशा मजबूत रखनी चाहिए, क्योंकि शाबाशी और धोखा दोनों पीठ के पीछे ही मिलते है.