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मैं वो खेल नहीं खेलता, जिसमे जीतना फिक्स हो, क्योंकि जीतने का मजा तब हैं, जब हारने का रिस्क हो

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उस जगह पे हमेशा खामोश रहना, जहाँ दो कौड़ी के लोग अपनी हैसियत के गुण गाते हैं
यही जज्बा रहा तो मुश्किलों का हल भी निकलेगा, जमीं बंजर हुई तो क्या वहीं से जल भी निकलेगा, ना हो मायूस ना घबरा अंधेरों से मेरे साथी, इन्हीं रातों के दामन से सुनहरा कल भी निकलेगा
जिंदगी में तपिश कितनी भी हो कभी हताश मत होना क्योंकि धूप कितनी भी तेज हो समंदर कभी सूखा नहीं करते.
जीवन में गिरना भी अच्छा है, औकात का पता चलता है, बढ़ते हैं जब हाथ उठाने को, तो अपनों का पता चलता है.
पतझड़ हुए बिना पेड़ों पर नए पत्ते नहीं आते, कठिनाई और संघर्ष सहे बिना अच्छे दिन नही आते.
दर्द, गम, डर जो भी है बस तेरे अंदर हैं, खुद के बनाये पिंजरे से निकल कर देख, तू भी एक सिकंदर हैं
यदि किसी काम को करने में डर लगे तो याद रखना यह संकेत है, कि आपका काम वाकई में बहादुरी से भरा हुआ है
दुनिया की कोई परेशानी आपके साहस से बड़ी नहीं है
जबतक शिक्षा का मकसद नौकरी पाना होगा, तब तक समाज में नौकर ही पैदा होंगे, मालिक नहीं
अपार आशाओं का खेल था सारा, मैंने इस खेल को समझा और देखते ही देखते जीत मेरी ही हुई ।