#Quote

और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा

Facebook
Twitter
More Quotes
अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए
और क्या देखने को बाक़ी है आप से दिल लगा के देख लिया
दर्द में हूँ देदे अपनी बाँहों की सुकून वाली रात तू है मेरी मोहब्बत मेरी सुकून आस.
तुम्हें देखा तो मोहब्बत भी समझ आई, वरना इस लफ्ज़ की तारीफ सिर्फ ही सुना करता था मैं !
न जी भर के देखा न कुछ बात की बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
मोहब्बत का दर्द तब होता है, जब तू दूर है और मेरी रातें लम्बी होती है!
उम्मीद छोड़ी हैं तुमसे मोहब्बत नहीं.
कोई सबूत नहीं होता है मोहब्बत का सामने नाम लेने पर धड़कने बढ़ जाए तो समझो मोहब्बत बेइंतेहा है !
मेरी जान मेरी दुआ है मुझे हर जन्म में तुमसे ही मोहब्बत हो..
मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले