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जब ‘दर्द’ और ‘कड़वी’ बोली दोनों मीठी लगने लगे तब समझ लीजिये कि जीना आ गया

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यूँ जमीन पर बैठकर क्यूँ आसमान देखता है पँखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है
दर्द, गम, डर जो भी है बस तेरे अंदर हैं, खुद के बनाये पिंजरे से निकल कर देख, तू भी एक सिकंदर हैं!
हम सभी को दो में से एक दर्द से पीड़ित होना चाहिए अनुशासन का दर्द या पछतावे का दर्द। अंतर यह है कि अनुशासन का वज़न ज़्यादा होता है जबकि अफसोस का वज़न बहुत ज़्यादा होता है।
सफ़र में मुश्किलें आये तो जुर्रत और बढ़ती है, कोई जब रास्ता रोके तो हिम्मत और बढ़ती है।
जो लोग दर्द को समझते हैं, वो लोग कभी दर्द की वजह नहीं बनते.
अगर दुसरों को दुखी देखकर तुम्हे भी दुःख होता है तो, समझ लो की उपर वाले ने तुम्हे इंसान बनाकर कोई गलती नहीं की है
जो चीज़ किसी ने मेहनत से हासिल की हो, वो आप अपनी ख्वाहिश से हासिल नहीं कर सकते…
अगर एक हारा हुआ इंसान हारने के बाद भी मुस्कूरा दें तो जितने वाला भी जीत की खुशी खो देता है।
जब परिवार के सदस्य अप्रिय लगने लगे और पराये अपने लगने लगे, तो समझ लीजिए विनाश का समय आरंभ हो गया है।
दर्द की दवा न हो, तो दर्द को ही दवा समझ लेना चाहिए…