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विधा एक कामधेनु के समान है जो हर मौसम में अमृत प्रदान करती है वह विदेश में एक माता के

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बड़ा सोचो ,जल्दी सोचो ,आगे सोचो विचारों पर किसी का अधिकार नहीं है।
निगाहों में मजे थी, गिरे और गिर कर संभलते रहे,
कश्तियां बदलने की जरुरत नहीं दिशाओं को बदलो तो किनारे खुद ब खुद बदल जाते हैं!
मैं अकेली हूं लेकिन फिर भी मैं हूं मैं सब कुछ नहीं कर सकती लेकिन मैं कुछ तो कर सकती हूं और सिर्फ इसलिए कि मैं सब कुछ नहीं कर सकती मैं वह करने से पीछे नहीं हटूंगी जो मैं कर सकती हूं। अकेली
हम जो कुछ भी है वह हमने आज तक क्या सोचा इस बात का परिणाम है यदि कोई व्यक्ति बुरी सोच के साथ बिताया काम करता है तो उसे कष्ट ही मिलता है यदि कोई व्यक्ति शुद्ध विचारों के साथ बोलता है या काम करता है तो उसकी परछाई की तरह खुशियों उसका साथ कभी नहीं छोड़ती।
कोई काम शुरू करने से पहले स्वयं से तीन प्रश्न कीजिए मैं यह क्यों कर रहा हूं इसके परिणाम क्या हो सकते हैं और क्या मैं सफल होगा और जब गहराई से सोचने पर इन प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर मिल जाए तभी आगे बढ़े
भले ही आप कपड़े पहनने में लापरवाही है पर अपनी आत्मा को दुरुस्त रखिए।
जो सही करने की हिम्मत उसी में आती है जो गलती करने से नहीं डरते है I
नजर को बदलो तो नजारे बदल जाते हैं , सोच को बदलो तो सितारे बदल जाते हैं
चिंता चिता समान है।