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ख़ुद को कमज़ोर समझना सबसे बड़ा पाप है।
आज से, आप जिस किसी से भी मिलें उसके साथ ऐसा व्यवहार करें जैसे कि वे आज रात मर रहे हों। आप जो भी देखभाल, दयालुता और समझ जुटा सकते हैं, उन सभी तक पहुँचाएँ और ऐसा इनाम के बारे में सोचे बिना करें। आपका जीवन फिर कभी इस तरह का नहीं रह पाएगा। - और मैंडिनो
क्या आश्चर्य है! जब मैं बदलूंगा तो सबसे पहले तुम बदलोगे। और मेरे बदलाव की वजह तुम हो.
दोस्ती का कोई मज़हब नहीं होता।
सच्ची बुद्धिमानी तब हममे से प्रत्येक व्यक्ति के पास आती है, जब हम यह जान जाते हैं कि हम जीवन के बारे में, अपने बारे में और अपने चारों ओर के संसार के बारे में कितना कम समझते हैं। – सुकरात
अँधेरे में परछाईं भी अपना साथ छोड़ देती है।
सबसे बुरे दिनों का भी अंत होता है और सबसे अच्छे दिनों की शुरुआत भी ज़रूर होती ही है।
सच्चा प्रेम समझ से उत्पन्न होता है।
ख़ुद वो बदलाव बनिए जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं।
विवेक प्रशिक्षण का परिणाम नहीं है, बल्कि इसे हासिल करने का आजीवन प्रयास है। - अल्बर्ट आइंस्टीन