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जैसे कभी जानते ही नहीं थे

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समझ नहीं आता किस पर भरोसा करू,
जब प्यार करने वाले अपने जज़्बातों को दबाकर, रिश्तों को कोई दूसरा नाम देते है, तो कभी न कभी, कहीं न कहीं जज्बातों फूट फूटके रोने लगते है
मैदान से हारा हुआ इंसान तो फिर से जीत सकता है, लेकिन मन से हारा हुआ इंसान कभी नहीं जीत सकता इसलिए मन से कभी हार मत मानना
अब ऐसे नफरत जताते हो
छुपा रहा हूं इश्क अभी सबसे पर एक दिन सरेआम तुम्हें लेने आऊंगा
प्यार में अगर किसी के लिए रोना आए तो समझ लेना प्यार सच्चा है
ज़िन्दगी भर नहीं दूंगा।
दुनिया को नफरत का सुबूत नहीं देना पड़ता,
मैं बिन फेरों के भी रिश्ता निभाऊंगा बश तुम मेरा हाथ थामें रखना
बहुत अनमोल वचन है ये कि किसी को कभी दुख न पहुंचाना। – सुप्रभात