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सुनो ! तुम मेरी वो आदत हो, जिसे मैं चाह कर भी नहीं छोड़ सकता !

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मेहनत अगर आदत बन जाए तो कामयाबी मुकद्दर बन जाती है।
तुम्हें देखा तो मोहब्बत भी समझ आई, वरना इस लफ्ज़ की तारीफ सिर्फ ही सुना करता था मैं !
जागना एक आदत है मेरी मेरी सफ़लता चाहत है मेरी।
वह जो सोचता है वही बन जाता है। (महात्मा गांधी)
उनकी आदतें ख़राब हो जाती है, जिनको हर चीज़ तैयार मिल जाती है!
सात फेरों से तो, महज शरीर पर हक मिलते हैं, आत्मा में हक तो रूह के फेरों से मिलते हैं !
दर्द कम नहीं हुआ है मेरा ! बस सहने की आदत हो गयी है !!
क्यूंकि इस दुनिया की तो राह में रोड़ा अटकाने की आदत है।
लोग अक्सर पूछते हैं मेरी खुशियों का राज, इजाजत दो तो आपका नाम बता दूं !
ना चांद की चाहत ना सितारों की फरमाइश, हर जन्म में तू मिले मेरी बस यही ख्वाहिश !