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स्वाभिमान मान्यता की एक अवस्था है कि एक व्यक्ति उतना ही महत्वपूर्ण और योग्य है जितना कि कोई अन्य इंसान।
सभी की खुशियों का ख्याल रखते-रखते हम बड़े हो जाते हैं, फिर एक दिन अचानक ही अपनी खुशी गायब हम पाते हैं।
स्वाभिमान से अधिक निकट स्वार्थ जैसा कुछ नहीं है।
एक पर्व ही बताता है कि ख्याल कितना है, वरना कोई तराजू नहीं होता रिश्तों में।
दुनिया में सबसे बड़ी बात यह जानना है कि खुद से कैसे जुड़ें। – मिशेल डी मोंटेन्यू
नैतिकता और ईमानदारी से हमें आत्म-सम्मान और गर्व की अनुभूति होती है, जो हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाती है।
आपको खुद की सम्मान करनी चाहिए, क्योंकि जब आप इसे करते हैं, तो आप उच्चतम गति के विचारों और लक्ष्यों की ओर बढ़ने लगते हैं।
खुद को सम्मान दीजिए, क्योंकि जब आप अपने आप में सम्मान करते हैं, तभी कोई दूसरा आपको सम्मान दे सकता है।
नारी के बलिदान को वही सम्मान मिलता है, जहाँ बहनों ने खुद से पहले भाई की खुशियों को रखा हो ।
मेरी हंसी-मेरी खुशी की इकलौती वजह तुम ही हो नारित्व की पहचान हो तुम, मेरे सम्मान की वजह तुम ही हो -- मयंक विश्नोई