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ज़िन्दगी की हक़ीक़त को बस इतना ही जाना है , दर्द में अकेले हैं खुशियों में ज़माना है
स्वयं के प्रति संतोष दूसरे के प्रति दया, इन्हीं दो पंखों से जीवन के आकाश को छु सकते हैं हम।
जिंदगी की उलझनों ने मेरी शरारतें कम कर दीं, और लोग समझते है कि मैं समझदार हो गया।
इंसान एक ऐसा ग़ाफिल मंसूबा साज़ है कि वह अपनी सारी जिंदगी की प्लानिंग में कभी अपनी मौत को शामिल ही नहीं करता।
अकेले रहने में और अकेले हो जाने में बहुत फर्क होता
जिनमें अकेले चलने का होंसला होता हैं, उनके पीछे एक दिन काफिला
जरूरी नहीं कि सारे सबक किताबों से ही सीखें जाते है, कुछ सबक जिंदगी और रिश्ते भी सिखा देते हैं।
मेरी जिंदगी एक बंद किताब है, जिसे आज तक किसी ने खोला नहीं, जिसने खोला उसने पढा नही, जिसने पढा उसने समझा नही, और जो समझ सका वो मिला नहीं।
किसी के पैरों में गिरकर कामयाबी पाने से बेहतर है, अपने पैरों पर चलकर कुछ बनने की ठान लो।
कुछ मिनट में जिंदगी नहीं बदलती, पर कुछ मिनट में सोच कर लिया हुआ फैसला पूरी जिंदगी बदल देता है इसलिए फैसलों को अहमियत दीजिये।