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बस यही दो मसले जिंदगी के हल ना हुए, ना नींद पूरी हुई ना ख्वाब मुकम्मल हुए..!!!
सवाल ज़हर का नही था, वो तो मैं पी गया, तकलीफ तो लोगो को तब हुई, जब मैं जी गया.!!!
दिन ब दिन खुद को खोता जा रहा हु मै, ये मैं भी नही जानता क्या होता जा रहा हु मै..!!
हकीकत भूल गए थे हम, जब से ख़्वाबों के पीछे चलना शुरू किया है I
मिला वो मुझे हर जगह, मिला ना हाथो की लकीरों में..!!!
जिंदगी की राहों में छुपा है ख़्वाबों का सफर, उड़ान भरना चाहिए हर अदब के साथ।
खुद की कीमत गिर जाती है, किसी को कीमती बनाने की चाहत में.!!!
तुम कहा हो मेरे करीब आओ, मैं कहा हु मुझे पता तो चले..!!!
हज़ारों उलझनें राहों में और कोशिशें बेहिसाब, इसी का नाम है ज़िंदगी चलते रहिए जनाब- गुलज़ार
खामोश चहरे पर हजारों पहरे होते है, हस्ती आंखो में भी ज़ख्म गहरे होते है