#Hindi Quote

जब ‘दर्द’ और ‘कड़वी’ बोली दोनों मीठी लगने लगे तब समझ लीजिये कि जीना आ गया

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दर्द, गम, डर जो भी है बस तेरे अंदर हैं, खुद के बनाये पिंजरे से निकल कर देख, तू भी एक सिकंदर हैं!
दर्द की दवा न हो, तो दर्द को ही दवा समझ लेना चाहिए…
हार वह सबक हैं जो आपको बेहतर होने का मौका देगी।
दर्द कम नहीं हुआ है मेरा ! बस सहने की आदत हो गयी है !!
वह व्यक्ति कुछ नहीं पा सकता जिसने उम्मीद खो दी है….
अक्सर लोग आलसी नहीं होते बल्कि उनके लक्ष्य कमजोर होते हैं…
यूँ जमीन पर बैठकर क्यूँ आसमान देखता है पँखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है
जो मिला उसमें ही खुश रहता हूं मेरी ऊंगलिया मुझे सिखाती है, दुनिया में एकसमान कोई नहीं।
जब परिवार के सदस्य अप्रिय लगने लगे और पराये अपने लगने लगे, तो समझ लीजिए विनाश का समय आरंभ हो गया है।
दर्द की दवा न हो तो दर्द को ही दवा समझ