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रोज रोज गिरकर भी मुकम्मल खड़ा हूँ, ए मुश्किलों देखो मैं तुमसे कितना बड़ा

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हार मत मान रे बंदे, कांटों में कलियां खिलती है अगर सच्ची लगन रखो, तो सफलता जरुर
किसी भी कार्य करने के लिए तुरन्त उठो, जागो और तब तक नही रुकना जब तक लक्ष्य हासिल न हो
महानता वह नहीं होती कि आप गिर गए और उठे ही ना, महानता उसे कहते हैं जब आप गिरकर बार-बार उठते हैं
इस बात से फर्क नहीं पड़ता तुम कितनी ग़लती करते हो या कितनी धीरे बढ़ रहे हो, उन लोगों से बहुत आगे हो जो कोशिश ही नहीं
हमे तुमसे प्यार कितना ये हम नहीं जाणते मगर जी नहीं सकते तुम्हारे बीना।
कोई भी लक्ष्य मनुष्य ने साहस से बड़ा नहीं, हरा वही है बस, जो लड़ा
मनुष्य कितना भी गोरा क्यों ना हो परंतु उसकी परछाई सदैव काली होती है…!! “मैं श्रेष्ठ हूँ” यह आत्मविश्वास है लेकिन…. “सिर्फ मैं ही श्रेष्ठ हूँ” यह अहंकार है
कितना अजीब भ्रम है ये मानना कि सुन्दरता
सोचने से कहाँ मिलते है तमन्नाओ के शहर, चलना भी जरुरी है मंजिल पाने के
हार मत मान रे बंदे, कांटों में कलियां खिलती है अगर सच्ची लगन रखो, तो सफलता जरुर मिलती