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सपनों की उड़ान वही भर सकते हैं, जो अपने डर को पीछे छोड़ देते हैं।
सभी खेल जो खेले जाने थे वे खेले गए और हम टूटी हुई नाव के साथ समुद्र में थे जब सुगंध हमारे हाथों को छूकर गुजर गई! सबको फूल देकर हम पत्थर बन गये।
दर्द, गम, डर जो भी है बस तेरे अंदर हैं, खुद के बनाये पिंजरे से निकल कर देख, तू भी एक सिकंदर हैं
हर चमकती हुई चीज़ सोना नहीं होती।
सच्ची बुद्धिमानी तब हममे से प्रत्येक व्यक्ति के पास आती है, जब हम यह जान जाते हैं कि हम जीवन के बारे में, अपने बारे में और अपने चारों ओर के संसार के बारे में कितना कम समझते हैं। – सुकरात
शेर हमेशा अकेला चलता है।
जहाँ भी आज़ाद रूह की झलक पड़े समझना वह मेरा घर है।
लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।– हरिवंश राय बच्चन
तुम लड़ो, तुम मेरी बहन की रक्षा करो छू न जाये ये दर्द मुझे, इस चिंता में इतना डर क्यों?
अगर तुम सूरज की तरह चमकना चाहते हो, तो पहले सूरज की तरह जलना सीखो।